महर्षि भारद्वाज: भारतीय विमानशास्त्र के जनक
History Nov 25, 2025
भारतीय संस्कृति सदैव से ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का भंडार रही है। ऐसा ही एक अद्भुत उदाहरण हैं महर्षि भारद्वाज, जिन्हें भारतीय विमानशास्त्र का जनक माना जाता है। उनके लिखे ग्रंथों में प्राचीन विज्ञान और उड़ने की तकनीकों का उल्लेख मिलता है।
यंत्र सर्वस्व — महर्षि भारद्वाज का ग्रंथ
महर्षि भारद्वाज ने ‘यंत्र सर्वस्व’ नामक ग्रंथ की रचना की थी। इस ग्रंथ में अनेक यंत्रों, उनके उपयोग और उन से संबंधित सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यंत्र सर्वस्व के एक भाग में विमान शास्त्र का वर्णन भी किया गया है।
विमान शास्त्र में क्या मिलता है?
विमान शास्त्र में प्राचीन काल में बनाए जाने वाले विमानों की रचना, संरचना और संचालन तक का विवरण दिया गया है। इसमें यह बताया गया है कि विमानों को कैसे बनाया जाए, किस प्रकार के यंत्रों की आवश्यकता होगी और उन्हें किस तरह संचालित किया जाए।
महर्षि भारद्वाज का योगदान
- विमान निर्माण की विधि का वर्णन।
- विभिन्न यंत्रों और उनके उपयोग की जानकारी।
- उड़ान तकनीक के सिद्धांतों का समावेश।
- प्राचीन भारतीय विज्ञान की शक्ति और दूरदर्शिता का प्रमाण।
क्यों महत्वपूर्ण है यह ज्ञान?
आज जब तकनीक और विज्ञान उन्नति के नए मुकाम छू रहे हैं, तब प्राचीन सभ्यताओं के ज्ञान को नए संदर्भ में समझना आवश्यक है। महर्षि भारद्वाज का विमान शास्त्र यह दर्शाता है कि प्राचीन भारत में तकनीकी ज्ञान कितना विकसित था और हमें अपने इतिहास के ज्ञान पर गर्व है।
निष्कर्ष
महर्षि भारद्वाज केवल एक ऋषि नहीं थे — वे ज्ञान और विज्ञान के प्रकाशस्तंभ थे। उनका 'यंत्र सर्वस्व' तथा उसमें शामिल विमान शास्त्र आज भी हमारे वैज्ञानिक इतिहास का अनमोल हिस्सा हैं।
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