शून्य (Zero) की खोज किसने की?
Education Nov 27, 2025
आज गणित, विज्ञान, कंप्यूटर, इंजीनियरिंग या किसी भी आधुनिक तकनीक की कल्पना शून्य (0) के बिना असंभव है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया को Zero देने वाला देश भारत है?
सार: शून्य का आविष्कार भारत में हुआ और इसे दुनिया तक पहुँचाने में आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त का अहम योगदान रहा।
शून्य की खोज — भारत का अनमोल योगदान
ऐतिहासिक शोध बताते हैं कि शून्य की खोज महान भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त से जुड़ी है।
- आर्यभट्ट (476 ई.) ने दशमलव संख्या प्रणाली में शून्य की अवधारणा का उपयोग किया।
- ब्रह्मगुप्त (628 ई.) ने पहली बार शून्य के साथ गणितीय नियम लिखे।
भारत से मिले शून्य के सबसे पुराने प्रमाण
- ग्वालियर के एक प्राचीन मंदिर में 9वीं शताब्दी का शून्य अंक मिला।
- बख्शाली पांडुलिपि (तक्षशिला) में भी शून्य के प्रयोग के प्रमाण मिले हैं।
क्यों था शून्य इतना क्रांतिकारी आविष्कार?
- बड़ी संख्याएँ बनाना संभव हुआ — 10, 100, 1000…
- दशमलव प्रणाली विकसित हुई।
- बीजगणित, ज्योतिष और खगोल विज्ञान में क्रांति आई।
- आज की डिजिटल दुनिया 0 और 1 (Binary) पर आधारित है।
ब्रह्मगुप्त द्वारा बताए गए शून्य के नियम
- किसी संख्या में शून्य जोड़ने पर संख्या नहीं बदलती।
- किसी संख्या से शून्य घटाने पर वही संख्या मिलती है।
- किसी संख्या को शून्य से गुणा करने पर उत्तर शून्य होता है।
भारत से दुनिया तक शून्य की यात्रा
भारत में जन्मा शून्य:
- अरब गणितज्ञों तक पहुँचा — उन्होंने इसे "सिफ़र" कहा।
- यूरोप पहुँचा — वहाँ यह "Zero" कहलाया।
निष्कर्ष
शून्य भारत का ऐसा महान योगदान है जिसने गणित, विज्ञान और तकनीक की दिशा बदल दी। आज की पूरी डिजिटल दुनिया भारतीय शून्य पर आधारित है।
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