घृताची : जिसने भंग कर दी कई ऋषि–मुनियों की तपस्या
Hinduism Dec 01, 2025
भारतीय पुराणों में अप्सराओं का उल्लेख सौंदर्य, आकर्षण और दिव्य शक्तियों के रूप में मिलता है। इनमें से एक प्रसिद्ध अप्सरा हैं घृताची, जिनकी कथा कई ग्रंथों और पुराणों में वर्णित है। कहा जाता है कि घृताची के सौंदर्य ने कई महान ऋषियों की तपस्या को भंग कर दिया।
घृताची कौन थीं?
घृताची एक दिव्य अप्सरा थीं, देवलोक में निवास करने वाली अत्यंत सुंदर, तेजस्वी और नृत्य-विशेषज्ञ अप्सरा। उनके दर्शन मात्र से साधक विचलित हो जाते और तपस्या टूट जाती।
किस प्रकार ऋषि-मुनियों की तपस्या भंग हुई?
पुराणों के अनुसार देवता कभी-कभी घृताची को पृथ्वी पर भेजते थे ताकि वह कुछ विशेष घटनाएँ या परीक्षा-चक्र प्रभावित कर सके। कई कथाओं में वर्णित है कि ऋषि जब घृताची को देखते, तो उनका मन विचलित होकर वर्षों की साधना भंग हो जाती।
घृताची और शुक्राचार्य
एक प्रसिद्द कथा में घृताची नदी स्नान के समय दिखी और महर्षि शुक्राचार्य वहाँ से गुजरे। उन्हें घृताची का रूप इतना आकर्षक लगा कि उनकी तपस्या भंग हुई और मिलन के फलस्वरूप प्रमिति नामक पुत्र का जन्म हुआ।
कृशाश्व और अन्य कथाएँ
घृताची और ऋषि कृशाश्व के सम्बन्ध से कई कन्याएँ उत्पन्न हुईं। कुछ ग्रंथों में कहा गया है कि उन्होंने 100 से अधिक कन्याओं को जन्म दिया, जिनके वंश ने आगे चलकर धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कौन कौन से ऋषि प्रभावित हुए?
कथाओं के अनुसार कई ऋषि—जिनमें शृंगी, श्वेतकेतु, भरद्वाज, हरीत और अन्य—घृताची से प्रभावित हुए। विशेषकर महर्षि भरद्वाज का उल्लेख मिलता है, जिनके वंश से कई प्रसिद्ध पात्र उत्पन्न हुए।
घृताची की भूमिका और अर्थ
घृताची केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं थीं—वह देवताओं की दूत, प्रतीकात्मक परीक्षा और मन के नियंत्रण की परीक्षा का एक पात्र थीं। उनकी कथाएँ हमें यह सिखाती हैं कि तपस्या और साधना तब तक सार्थक है जब मन पूरी तरह संयम में रहे।
निष्कर्ष
घृताची की कथाएँ मन, तपस्या और आध्यात्मिक अनुशासन की गहराई को रेखांकित करती हैं। वे बताती हैं कि सच्ची साधना और ज्ञान तभी फलती-फूलती है जब मन प्रतिबद्ध और नियंत्रित हो।
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