हनुमान जी की शक्ति और विनम्रता के संयोग की अनूठी कहानी
Hinduism Dec 08, 2025
हनुमान जी क्यों कहलाते हैं संकटमोचन?
किसी भी संकट ने हनुमान जी को आगे बढ़ने से कभी नहीं रोका। इसीलिए उन्हें संकटमोचन कहा जाता है। ग्रंथों में लिखा है
- वे पवनदेव के पुत्र हैं
- माता अंजनी के लाल
- भगवान शंकर के अंशावतार
- और ब्रह्माजी द्वारा ज्ञान प्राप्त
उनका यह दिव्य संयोजन उन्हें अद्वितीय शक्ति प्रदान करता है।
रामकाज करिबे को आतुर
सीता जी को कौन ढूंढने जाएगा- हनुमान, संजीवनी बूटी कौन लाएगा- हनुमान। इस संसार में ऐसा कौन सा काम है जो हे तत्त्व, तुम नहीं कर सकते हो। रामकाज के लिए ही तुम्हारा अवतार हुआ है।
पीपल का पेड़, प्रेत और तुलसीदास
तुलसीदास कहते भी हैं कि राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिन पैसारे। हनुमान के बिना आप प्रभु राम के दर्शन नहीं कर सकते।
रामचरित मानस अपने आप में हनुमान खुद ही है
हनुमान जी किसी के भी शत्रु नहीं हैं। हनुमान से ज्यादा आपको कोई सत्संग दे ही नहीं सकता। रामचरितमानस अपने आप में हनुमान खुद ही हैं। कलम तुलसीदास के थे लेकिन विचार हनुमान के थे।
जब ताकत दिखानी थी तो बड़े हुए, बुद्धि दिखाने की बारी आई तो छोटे हो गए
हनुमान जी का टकराव सुरसा के साथ हुआ। सुरसा ने अपना मुख बढ़ाया एक योजना का लेकिन हनुमान जी ने योजना के अनुसार जब सुरसा ने 64 योजन का मुख किया तो हनुमान जी ने सूक्ष्म रूप धर कर उसके मुख से वापस आ गया।
हनुमान जी की शक्ति और विनम्रता का संयोग
आसमान में उनका सूरज से सामना हुआ। उन्होंने विनम्रता से कहा- हे सूरज इतना याद रहे, संकट एक सूरज वंश है, लंका के बीच राह दुर्गा आयी दिनेश अंश पर थे। इसलिए छिपे रहना भगवान जब तक न जड़ी पहुंच दूँ, बस तभी प्रकट होना दिनकर जब संकट नाश मिटा दूँ मैं।
निष्कर्ष
हनुमान जी की कहानी सिर्फ़ एक पौराणिक कथा नहीं—
यह जीवन जीने का मार्ग है।
वे सिखाते हैं:
- संकट में साहस
- सफलता में विनम्रता
- और सेवा में समर्पण
इसलिए आज भी करोड़ों लोग हनुमान जी की भक्ति से शक्ति और शांति दोनों प्राप्त करते हैं।
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