ISRO Scientist की दर्दनाक कहानी: गद्दारी का झूठा आरोप और पद्मभूषण तक की यात्रा
News Dec 13, 2025
एक ISRO स्पेस साइंटिस्ट पर लगे झूठे गद्दारी के आरोप ने उनकी जिंदगी बदल दी। बाद में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया। जानिए पूरा सच और भावनात्मक सफर।
परिचय — एक वैज्ञानिक, एक झूठा आरोप, और एक महान वापसी
भारत के इतिहास में कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं जो सिर्फ पढ़ी नहीं जातीं—दिल को हिला देती हैं। यह कहानी है एक ऐसे वैज्ञानिक की:
- जिसने भारत का स्पेस ड्रीम मजबूत किया
- जिनकी बुद्धि और शोध ने ISRO को नई दिशा दी
- लेकिन जिन पर अचानक लगा गद्दारी और जासूसी का आरोप
- और जिनकी पूरी जिंदगी पल भर में बर्बाद हो गई
लेकिन अंत में—सत्य जीता, सम्मान वापस मिला, और भारत ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया।
यह कहानी है नंबी नारायणन की।
कौन थे नंबी नारायणन?
डॉ. नंबी नारायणन ISRO के वरिष्ठ क्रायोजेनिक वैज्ञानिक थे। वे उस टीम का हिस्सा थे जो भारत को अपने क्रायोजेनिक इंजन बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही थी। क्रायोजेनिक इंजन वह तकनीक है जिससे भारी रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुंचते हैं।
भारत इस तकनीक के लिए विदेशी देशों पर निर्भर था, और जब नंबी जी इसे स्वदेशी रूप से विकसित कर रहे थे… तभी एक तूफान आया।
1994 — गद्दारी और जासूसी का झूठा आरोप
एक दिन अचानक पुलिस, खुफिया एजेंसियाँ और मीडिया सबने नंबी नारायणन पर आरोप लगाया कि वह भारत की स्पेस तकनीक दुश्मन देशों को बेच रहे हैं।
कोई सबूत नहीं। कोई प्रमाण नहीं। लेकिन मीडिया ट्रायल ज़ोरों पर था।
उन्हें गिरफ्तार किया गया। पूछताछ हुई। मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। परिवार टूट गया। करियर दांव पर लग गया।
CBI ने कहा — ‘आरोप झूठे हैं’
CBI ने जांच की और साफ कहा:
- कोई जासूसी नहीं हुई
- कोई सौदा या राज लीक नहीं हुआ
- पूरा केस मनगढ़ंत है
- वैज्ञानिक को फंसाया गया है
लेकिन नुकसान हो चुका था। एक महान वैज्ञानिक का करियर, इज्जत, मानसिक शांति—सब छीना जा चुका था।
2001 – सुप्रीम कोर्ट ने नंबी जी को साफ बरी किया
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
“नंबी नारायणन निर्दोष हैं। उन्हें नुकसान पहुंचाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।”
यह न सिर्फ निर्णय था—यह न्याय की जीत थी।
2019 — भारत सरकार ने दिया पद्मभूषण
नंबी जी की प्रतिष्ठा, संघर्ष और देश के लिए योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया।
उसी वैज्ञानिक को, जिसे कभी “देशद्रोही” कहा गया था… आज भारत उन्हें रॉकेट विज्ञान का नायक मानता है।
यह सिर्फ एक केस नहीं—सम्मान और अन्याय की लड़ाई थी
यह घटना हमें तीन बड़े संदेश देती है:
- सच्चाई की आवाज कभी दबती नहीं — भले ही कितने आरोप लग जाएं।
- देशभक्ति सिर्फ शब्द नहीं—एक जीवन संघर्ष है — नंबी जी ने साबित किया।
- न्याय देर से मिले तो भी उसकी कीमत अमूल्य होती है.
आज नंबी जी की कहानी देश की प्रेरणा है
उन पर बनी फिल्म “Rocketry: The Nambi Effect” ने पूरी दुनिया को दिखाया कि कैसे एक वैज्ञानिक ने दर्द, अन्याय और अपमान के बावजूद हार नहीं मानी। आज युवा वैज्ञानिक नंबी जी को एक रोल मॉडल की तरह देखते हैं।
अंतिम विचार
“जब सत्य के साथ खड़े रहो, तो दुनिया एक दिन सम्मान देने के लिए खड़ी हो ही जाती है।”
एक वैज्ञानिक जिसकी इज्जत छीनी गई—लेकिन जिसने अपनी सच्चाई और ज्ञान की रोशनी से फिर दुनिया को चकाचौंध कर दिया।
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