जिस भारतीय को एलन मस्क ने समझा बेकार, उसी ने टेक दुनिया में नई इबारत लिखी
News Dec 10, 2025
टेक इंडस्ट्री में जब भी किसी भारतीय का नाम दुनिया भर में गूंजता है, तो उनमें से एक चमकता हुआ नाम है पराग अग्रवाल — वह भारतीय जिसने Twitter जैसी दुनिया की बड़ी टेक कंपनी का नेतृत्व किया। यह कहानी सिर्फ एक सीईओ बनने की नहीं, बल्कि मेहनत, प्रतिभा और अवसर को पकड़ने की कला की कहानी है।
किसी की राय आपकी क्षमता तय नहीं करती — यह बात एक भारतीय उद्यमी ने सच करके दिखा दी। एक समय एलन मस्क ने उन्हें "not useful" कहा था। लेकिन आज वही भारतीय 30 मिलियन डॉलर (लगभग ₹250+ करोड़) की AI कंपनी Parallel Web Systems के मालिक हैं।
कौन हैं यह भारतीय?
पराग अग्रवाल एक भारतीय–अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने IIT बॉम्बे से पढ़ाई की और आगे Stanford University में PhD की। 2021 में उन्होंने Twitter के CEO का पद सम्भाला और वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई। भारत के एक साधारण परिवार से आने वाले पराग अग्रवाल ने छोटी उम्र में ही तकनीक के प्रति गहरी रुचि विकसित कर ली थी।
उनकी शैक्षणिक यात्रा
- स्कूलिंग: मुंबई ( स्कूल में टॉपर )
- ग्रेजुएशन: IIT बॉम्बे – Computer Science ( कॉलेज में AI और कोडिंग में पकड़ )
- आगे की पढ़ाई: Stanford University (PhD in Computer Science)
- रिसर्च फील्ड: Machine Learning, Distributed Systems, Artificial Intelligence
- SpaceX/Big Tech में इंटर्नशिप की कोशिश — लेकिन रिजेक्शन
Twitter तक का सफर
पराग ने 2011 में Twitter जॉइन किया। शुरुआत में इंजीनियर के रूप में काम करते हुए उन्होंने कंपनी में महत्वपूर्ण तकनीकी योगदान दिए और धीरे-धीरे ऊपर बढ़ते गए।
Twitter में प्रमुख उपलब्धियाँ
- विज्ञापन सिस्टम में सुधार
- AI और ML तकनीकों का विकास
- Platform की सुरक्षा और स्केलेबिलिटी में योगदान
- 2017 में Chief Technology Officer (CTO) बने
ट्विटर का CEO बनना – ऐतिहासिक पल
जब जैक डोर्सी ने CEO पद से इस्तीफा दिया, तो पराग को कंपनी का नेतृत्व सौंपा गया। जैक ने सार्वजनिक रूप से कहा कि पराग ही कंपनी को आगे ले जाने के लिए सही व्यक्ति हैं। यह खबर भारत में युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा बनकर आयी।
एलन मस्क से टकराव और इस्तीफा
2022 में Elon Musk के अधिग्रहण के दौरान कंपनी में बड़े परिवर्तन आये। मस्क और पराग के बीच कई नीति और प्रबंधन सम्बंधित मतभेद हुए, जिसके बाद पराग CEO पद से हट गये। यह घटना उनके करियर का एक चुनौतीपूर्ण मोड़ थी।
Twitter छोड़ने के बाद
Twitter छोड़ने के बाद पराग ने AI एवं टेक स्टार्टअप्स में निवेश और मेंटरशिप पर ध्यान दिया। वे AI, LLM और भविष्य की टेक्नोलॉजी पर सक्रिय रहे और कई स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन दिया।
जहाँ कई लोग टूट जाते, पार्थ ने रिजेक्शन को प्रेरणा बनाया। उन्होंने AI और Automation पर काम शुरू किया और धीरे-धीरे यह प्रोजेक्ट एक स्टार्टअप में बदल गया। निरंतर सुधार और नए इनोवेशन के कारण कंपनी Parallel Web Systems ने बाज़ार में अपना स्थान बनाया।
उनकी कंपनी Parallel Web Systems क्या करती है?
कंपनी मुख्यतः इन क्षेत्रों में काम करती है:
- Generative AI Automations
- AI Customer Support Bots
- Predictive AI Models
- AI-Driven SaaS Tools
कंपनी की वैल्यू — $30 Million
कई Angel Investors और Tech Funds के निवेश के साथ कंपनी का विस्तार हुआ। आज इसकी वैल्यू लगभग $30 Million पहुंच चुकी है — एक समय जो ‘बेकार’ कहा गया था, अब AI उद्योग में उभरता सितारा बन चुका है।
इस कहानी से क्या सीखें?
- किसी की राय आपकी कीमत नहीं तय करती — मेहनत और प्रतिभा खुद रास्ता बनाती है।
- रिजेक्शन = नया दिशा निर्देश — इसे सीखने और बेहतर बनने का जरिया बनाइए।
- आत्मविश्वास सबसे बड़ा हथियार है — खुद पर भरोसा रखें और आगे बढ़ें।
अंतिम विचार
यह कहानी हर युवा को संदेश देती है — "जब तक आप खुद को नहीं छोड़ते, दुनिया आपको नहीं रोक सकती।" छोटी-छोटी असफलताएँ अक्सर बड़ी सफलताओं की पहली सीढ़ी होती हैं।
भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा
पराग अग्रवाल की कहानी यह दिखाती है कि अगर आपके पास मेहनत, फोकस और कौशल है तो आप दुनिया की टॉप कंपनियों में नेतृत्व कर सकते हैं—चाहे आपकी शुरुआत कहीं भी हुई हो।
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