अरावली पर्वतमाला: करोड़ों साल पुरानी धरोहर, आज संकट के दौर में
News Dec 22, 2025
भारत की भौगोलिक और प्राकृतिक विरासत में अरावली पर्वतमाला का स्थान बेहद खास है। यह पर्वतमाला न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी पृथ्वी की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक मानी जाती है।
दुर्भाग्य से, आज यही अरावली अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है।
अरावली का इतिहास: करोड़ों साल पुरानी विरासत
अरावली पर्वतमाला की उम्र लगभग 150 से 250 करोड़ वर्ष मानी जाती है।
- यह हिमालय से भी कई गुना पुरानी है
- जब पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तब अरावली मौजूद थी
- इसे दुनिया की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में गिना जाता है
यही वजह है कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि पृथ्वी के इतिहास की जीवित गवाह है।
अरावली पर्वतमाला कहाँ तक फैली है?
अरावली पर्वतमाला लगभग 800 किलोमीटर तक फैली हुई है।
- गुजरात
- राजस्थान
- हरियाणा
- दिल्ली
राजस्थान का बड़ा हिस्सा अरावली की भौगोलिक संरचना पर निर्भर करता है।
अरावली का पर्यावरणीय महत्व
1. मरुस्थलीकरण को रोकने में भूमिका
अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल को पूर्वी भारत की ओर फैलने से रोकने में एक प्राकृतिक दीवार का काम करती है।
2. जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज
अरावली क्षेत्र भूजल रिचार्ज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई नदियों और जलस्रोतों की उत्पत्ति इसी क्षेत्र से होती है।
3. जैव विविधता का केंद्र
यह क्षेत्र अनेक वन्यजीवों, पक्षियों और दुर्लभ पौधों का प्राकृतिक आवास है।
अरावली पर मंडराता खतरा
आज अरावली का अस्तित्व तेज़ी से समाप्त होता जा रहा है।
अवैध खनन
पत्थर और खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर खनन ने अरावली की संरचना को भारी नुकसान पहुँचाया है।
अनियंत्रित शहरीकरण
दिल्ली–एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ता कंक्रीट विकास अरावली को निगलता जा रहा है।
जंगलों की कटाई
वन क्षेत्र कम होने से बारिश, तापमान और जलस्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
अगर अरावली खत्म हो गई तो?
- मरुस्थल दिल्ली–एनसीआर तक फैल सकता है
- भूजल स्तर और अधिक गिर जाएगा
- प्रदूषण और तापमान में वृद्धि होगी
- वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा
यह संकट केवल प्रकृति का नहीं, बल्कि मानव जीवन का भी है।
अरावली को बचाने के प्रयास
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा खनन पर रोक
- कुछ क्षेत्रों को संरक्षित घोषित करना
- पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संगठनों की पहल
लेकिन इन प्रयासों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करना अभी भी बड़ी चुनौती है।
निष्कर्ष
अरावली पर्वतमाला भारत की प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है।
जिस पर्वत श्रृंखला ने करोड़ों वर्षों का समय देखा हो, उसे कुछ दशकों की लापरवाही से खत्म कर देना एक ऐतिहासिक भूल होगी।
अरावली को बचाना केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है।
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