सज़ा से बड़ा ज्ञान
Story Nov 18, 2025
एक आश्रम में एक संत रहते थे जो बच्चों को शिक्षा देने का कार्य करते थे। दूर-दूर से बच्चे आकर उनसे ज्ञान प्राप्त करते थे। एक दिन आश्रम में एक नया शिष्य आया। संत ने उसका स्वागत किया और अन्य शिष्यों से उसका परिचय कराया।
लेकिन नए शिष्य की एक बुरी आदत थी—वह चोरी करता था। जब भी उसे मौका मिलता, वह अन्य शिष्यों का सामान चुरा लेता।
बार-बार चोरी और शिकायतें
कुछ दिनों बाद कुछ शिष्यों ने उसे चोरी करते पकड़ा और संत के पास शिकायत लेकर पहुँचे। संत ने शांत मन से उनकी बात सुनी और बताया कि लड़का चोरी कर रहा है। लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि संत ने उस लड़के को कोई सज़ा नहीं दी और न ही उसे आश्रम से निकालने की बात की—उन्होंने उसे बस वापस भेज दिया।
यह देखकर सभी शिष्य हैरान रह गए।
कुछ ही दिनों बाद वह लड़का फिर चोरी करते पकड़ा गया। फिर से शिकायत संत तक पहुँची। परंतु संत ने इस बार भी कोई दंड नहीं दिया।
शिष्यों का विरोध
जब ऐसा कई बार हुआ तो दूसरे शिष्य नाराज़ हो गए। उन्होंने संत से कहा—
“अगर इसे ऐसे ही रहने दिया गया तो यह कभी नहीं सुधरेगा। इसे आश्रम से निकाल दीजिए।”
संत ने शांत स्वर में कहा—
“यह लड़का नया है और बुरी आदतों में फंसा हुआ है। जिस स्थान पर यह पहले था, वहां से इसने चोरी करना सीखा। यहाँ तो हम अच्छे संस्कार देते हैं। अगर मैं इसे अभी निकाल दूँगा, तो यह कभी नहीं सुधरेगा और आगे जाकर और बड़ा चोर बन जाएगा।
लेकिन अगर यह हमारे बीच रहेगा तो एक दिन अवश्य ही अपनी गलती समझकर सुधर जाएगा। इसे सज़ा देना आसान है, मगर सुधारना ही असली शिक्षा है।”
संत की बात सुनकर सभी शिष्यों को अपनी गलती का एहसास हुआ। वे समझ गए कि सज़ा देने से नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन से ही व्यक्ति बदल सकता है। इसके बाद सभी शिष्यों ने उसे क्षमा कर दिया और उसके सुधार में संत की मदद करने लगे।
सीख
जिन लोगों में बुरी आदतें होती हैं, उन्हें दंड देना आसान है, लेकिन उन्हें सही ज्ञान और सही शिक्षा देकर सुधारना ही सबसे बड़ा धर्म है।
सज़ा नहीं, बल्कि ज्ञान ही किसी को बेहतर इंसान बना सकता है।
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