अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों या अखबारों में जब भी किसी युद्ध की खबर आती है, तो अक्सर एक हथियार का नाम बहुत सुनने को मिलता है— ‘क्लस्टर मिसाइल’ या ‘क्लस्टर बम’ (Cluster Munitions)। मानवाधिकार संगठन (Human Rights Organizations) हमेशा इस हथियार के इस्तेमाल का कड़ा विरोध करते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्लस्टर मिसाइल क्या होती है? यह आम मिसाइलों से कैसे अलग है और क्यों दुनिया के 100 से ज्यादा देशों ने इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध (Ban) लगा रखा है?
आज Gyan4u के इस लेख में हम इसी खतरनाक और विवादित हथियार के बारे में बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में समझेंगे।
क्लस्टर मिसाइल या क्लस्टर बम क्या होता है?
सरल शब्दों में समझें तो, ‘क्लस्टर’ (Cluster) का मतलब होता है— गुच्छा या समूह।
क्लस्टर मिसाइल कोई एक सिंगल बम नहीं होता, बल्कि यह एक बहुत बड़ा खोखला खोल (कंटेनर) होता है, जिसके अंदर दर्जनों या सैकड़ों छोटे-छोटे बम भरे होते हैं। इन छोटे बमों को तकनीकी भाषा में ‘बॉम्बलेट्स’ (Bomblets) या ‘सबम्यूनिशन’ (Submunitions) कहा जाता है।
जब इस मिसाइल को फाइटर जेट, तोप या जमीन से फायर किया जाता है, तो यह लक्ष्य से टकराकर एक ही जगह पर धमाका नहीं करती। बल्कि, यह हवा में ही खुल जाती है और अपने अंदर मौजूद सैकड़ों छोटे बमों को एक बहुत बड़े इलाके (जैसे कई फुटबॉल मैदानों के बराबर जगह) में फैला देती है।
क्लस्टर मिसाइल कैसे काम करती है? (How it works)
इसकी कार्यप्रणाली (Mechanism) बहुत ही खौफनाक और विनाशकारी होती है। आइए इसे स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं:
लॉन्चिंग (Launching): सबसे पहले मुख्य क्लस्टर मिसाइल या बम को हवाई जहाज (Fighter Jet) से गिराया जाता है या ज़मीन से दागा जाता है।
हवा में खुलना (Mid-air Opening): टारगेट के पास पहुँचते ही, यह मुख्य मिसाइल ज़मीन पर गिरने से पहले ही हवा में एक तय ऊँचाई पर (टाइमर या सेंसर की मदद से) खुल जाती है।
छोटे बमों का फैलाव (Dispersal): मिसाइल का बाहरी खोल टूटते ही, उसके अंदर मौजूद सैकड़ों छोटे बम (Bomblets) बाहर निकल आते हैं। इनमें छोटे-छोटे पैराशूट या पंख लगे हो सकते हैं, जिससे वे एक बड़े क्षेत्रफल में फैल जाते हैं।
विनाशकारी धमाका (Impact): जब ये सैकड़ों छोटे बम ज़मीन पर गिरते हैं, तो एक साथ कई सारे धमाके होते हैं। एक ही समय में एक बहुत बड़े इलाके में तबाही मच जाती है।
सामान्य मिसाइल और क्लस्टर मिसाइल में क्या अंतर है?
अगर आप सोच रहे हैं कि सेनाएं आम मिसाइल की जगह इसका इस्तेमाल क्यों करती हैं, तो दोनों का अंतर समझना ज़रूरी है:
सामान्य मिसाइल (Precision Weapon): यह ‘पिन-पॉइंट एक्यूरेसी’ (सटीकता) पर काम करती है। अगर इसे किसी एक बिल्डिंग या दुश्मन के बंकर को तबाह करने के लिए दागा गया है, तो यह सिर्फ उसी जगह को उड़ाएगी।
क्लस्टर मिसाइल (Area Weapon): इसका मकसद सटीकता नहीं, बल्कि ‘इलाके की तबाही’ है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब दुश्मन की सेना एक जगह न होकर बहुत बड़े इलाके में फैली हो, या रनवे, बख्तरबंद गाड़ियों की पूरी टुकड़ी को एक साथ तबाह करना हो।
क्लस्टर बम इतने खतरनाक और विवादित क्यों हैं?
यह हथियार पूरी दुनिया में इतना बदनाम है कि इसे युद्ध के सबसे क्रूर हथियारों में गिना जाता है। इसके मुख्य दो कारण हैं:
1. आम नागरिकों (Civilians) को भारी नुकसान
चूँकि क्लस्टर मिसाइल एक बहुत बड़े इलाके (कई किलोमीटर तक) में अपने बम बिखेरती है, इसलिए यह फर्क नहीं कर पाती कि कहाँ दुश्मन के सैनिक हैं और कहाँ आम जनता के घर, स्कूल या अस्पताल। इस हथियार के इस्तेमाल से सबसे ज्यादा मौतें बेगुनाह नागरिकों और बच्चों की होती हैं।
2. अनएक्सप्लोडिड ऑर्डनेंस (UXO) – ‘जिंदा बम’ का खतरा
यह क्लस्टर बम की सबसे डरावनी सच्चाई है। हवा से गिरे सभी छोटे बम ज़मीन पर टकराते ही नहीं फटते। तकनीकी खराबी के कारण लगभग 10% से 40% बॉम्बलेट्स बिना फटे ज़मीन पर पड़े रह जाते हैं।
ये बिना फटे बम (UXO) बारूदी सुरंग (Landmines) की तरह काम करते हैं। युद्ध खत्म होने के सालों बाद भी, अगर कोई बच्चा इन्हें खिलौना समझकर उठा ले या किसी किसान का पैर इन पर पड़ जाए, तो ये फट जाते हैं। यानी युद्ध खत्म होने के बाद भी यह हथियार दशकों तक लोगों की जान लेता रहता है।
क्लस्टर हथियारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध (The Ban on Cluster Munitions)
क्लस्टर मिसाइलों से होने वाली इस अमानवीय तबाही को देखते हुए, दुनिया भर के देशों ने मिलकर इसके खिलाफ आवाज़ उठाई।
2008 का समझौता: साल 2008 में ‘कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशंस’ (Convention on Cluster Munitions – CCM) नाम का एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता लाया गया।
क्या है यह समझौता? इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देश कभी भी क्लस्टर बम का इस्तेमाल, उत्पादन, ट्रांसफर या भंडारण नहीं कर सकते।
कितने देशों ने बैन किया? अब तक दुनिया के लगभग 120 से ज्यादा देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं और इसे पूरी तरह बैन कर दिया है। (इसमें ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे देश शामिल हैं)।
एक कड़वी सच्चाई: अमेरिका, रूस, चीन, और इस्राइल जैसे दुनिया के कुछ सबसे शक्तिशाली देशों ने आज तक इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उनका मानना है कि युद्ध की कुछ विशेष परिस्थितियों में यह हथियार उनके लिए ज़रूरी है।
निष्कर्ष (Conclusion)
युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, और क्लस्टर मिसाइल जैसे हथियार युद्ध को और भी ज्यादा वीभत्स और अमानवीय बना देते हैं। एक हथियार जो युद्ध खत्म होने के 20 साल बाद भी किसी मासूम बच्चे की जान ले ले, उसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।
आज दुनिया को हथियारों की नहीं, बल्कि शांति और तकनीकी विकास की ज़रूरत है। उम्मीद है कि भविष्य में बाकी बचे बड़े देश भी इस विनाशकारी हथियार पर पूरी तरह से रोक लगाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: क्लस्टर मिसाइल (Cluster Missile) क्या होती है?
उत्तर: क्लस्टर मिसाइल एक ऐसा बड़ा बम होता है जिसके अंदर दर्जनों या सैकड़ों छोटे-छोटे बम (Bomblets) भरे होते हैं। यह हवा में खुलकर एक बहुत बड़े इलाके में इन छोटे बमों को गिराकर तबाही मचाता है।
Q2: दुनिया में क्लस्टर बम को बैन क्यों किया गया है?
उत्तर: क्योंकि यह हथियार सटीक नहीं होता और एक बड़े इलाके में फैलता है, जिससे आम नागरिकों की सबसे ज्यादा जान जाती है। साथ ही, इसके कई छोटे बम बिना फटे ज़मीन पर गिर जाते हैं, जो सालों बाद भी लैंडमाइन की तरह फटकर लोगों की जान लेते हैं।
Q3: क्या भारत ने क्लस्टर बम पर प्रतिबंध लगाया है?
उत्तर: भारत, अमेरिका, रूस और चीन उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने 2008 की ‘कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशंस’ (CCM) संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
Q4: क्लस्टर बम में बॉम्बलेट्स (Bomblets) किसे कहते हैं?
उत्तर: क्लस्टर मिसाइल के मुख्य खोल के अंदर जो छोटे-छोटे विस्फोटक बम भरे होते हैं, उन्हें तकनीकी भाषा में बॉम्बलेट्स या सबम्यूनिशन कहा जाता है।
Q5: क्लस्टर बम का सबसे बड़ा नुकसान क्या है?
उत्तर: इसका सबसे बड़ा नुकसान ‘अनएक्सप्लोडिड ऑर्डनेंस’ (UXO) है। यानी वे छोटे बम जो ज़मीन पर गिरकर तुरंत नहीं फटते, वे भविष्य में मासूम लोगों और किसानों के लिए जानलेवा साबित होते हैं।
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